line image उज्जैन के पौराणिक और प्राचीन नाम
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उज्जैन के पौराणिक और प्राचीन नाम मालवा की हृदय स्थली उज्जैन क्षिप्रा तट पर बसी हुई है।यहां जो भी आता है महाकाल की शरण में आ जाता है, वह यही रम जाता है। भगवान शिव ने पाशुपत अस्त्र से त्रिपुरासुर का हनन किया था इसी विजयी के उपलक्ष्य में अवंती को उज्जयिनी कहा गया।उज्जैन के प्राचीन एवं पौराणिक नाम इस प्रकार है-

अवंती - सब प्राणियों की रक्षा करने के अर्थ में इसे अवंती कहा गया है।

कुशस्थली - यहां पर ब्रह्मा द्वारा स्थापित कुश आसन पर विराजमान होकर विष्णु भगवान ने राज्य विधान की रचना की थी। इसीलिए इसे कुशस्थली कहा गया है।

पद्मावती -देव-दानवों ने समुद्र मंथन किया। उसमें प्राप्त चौदह रत्नों के लिए वे झगड़ पड़े। रक्षा के लिए नारदजी ने लक्ष्मी को महाकाल वन में भिजवा दिया। लक्ष्मी ने यहां स्थायी रूप से निवास किया। अतएव इसे पद्मावती कहा गया। पद्मावती लक्ष्मी का नाम है।

कुमुदवती -एक बार लोमश ऋषि ग्रीष्मकाल में उज्जैन पधारे। उन्होंने यहां के सरोवरों में पुष्पित कुमुद यानी कमल देखकर इसका नाम कुमुदवती रखा।

अमरावती -कश्यप , मरीची आदि ऋषिगण ब्रह्मा की आज्ञा से यहां तप करने के लिए पधारे। उन्होंने यहां देखा कि अमरगण तथा देव तुल्य स्त्री पुरूष निवास करते है। इसीलिए इसे अमरावती कहा गया।

विशाला -आकार में विशाल होने से यह नगरी विशाला कहलाई।

प्रतिकल्पा -यह नगरी सदैव उत्पत्ति प्रलय धर्म से रहित है। प्रत्येक युग अर्थात् कल्च में इसके ऐश्वर्य गुण धर्म रहने से यह प्रतिकल्पा कहलाई।

कनकश्रृंगा -सोने की अट्टालिका युक्त महलों के कारण इसे कनकश्रृंगा भी कहा गया। विश्वकर्मा ने इसकी रचना शिव के निवासार्थ की थी।

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