line image Durgadas Ki Chhatri (दुर्गादास की छतरी)
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दुर्गादास की छतरी उज्जैन के मंदिरों के शहर में स्थित एक विशिष्ट स्मारक है। यह स्मारक छतरी के रूप में वीर दुर्गादास की याद में बनवाया गया था जो कि राजपूताना इतिहास में एक महान शख्सियत है।


वीर दुर्गादास ने महाराज जसवंत सिंह की मृत्यु के बाद मुग़लों से लड़ाई की और औरंगज़ेब की इच्छा के विरुद्ध जोधपुर पर चढ़ाई करने में अजीत सिंह की सहायता की।इस बहादुर आदमी की 1718 में मृत्यु हो गई और इसकी इच्छा थी कि इसका दाह संस्कार शिप्रा नदी के किनारे किया जाए।


इस स्मारक की वास्तुकला राजपूत शैली में है तथा एक प्रसिद्ध पर्यटन स्थल है। यह छतरी वीर दुर्गादास की मृत्यु के बाद जोधपुर के शासकों द्वारा उसकी याद में बनवायी गई थी।बहुत से लोगों का यह मानना है कि यह स्मारक छोटे से रत्न की तरह चमकता है चूंकि आसपास का परिदृश्य प्रकृति से भरपूर है।


Durgadas Ki Chhatri (Description In English)


Durgadas Ki Chhatri is a distinctive monument that is situated in the temple town of Ujjain. The monument has been built in the form of Chhatri in the memory of Vir Durgadas, who is a legendary figure in the history of Rajputana.


Vir Durgadas fought against the Moghuls after the death of Maharaja Jashwant Singh and helped Ajit Singh to ascend the throne of Jodhpur against the wishes of Aurangzeb. This brave man died in the year 1718, and his wish was to perform his funeral rites on the bank of the river Shipra.


The monument resembles the Rajput style of architecture and is one of the famous spots for tourists. The Chhatri was built after the death of Vir Durgadas by the rulers of Jodhpur in order to consecrate his memories. There are many who believe that the monument glows like a small jewel as the surrounding landscape is completely lush in nature.


Durga das ki chhatri is situated near harsiddhi mata temple.


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