line image Nagar Kot Ki Rani (नगरकोट की रानी )
img


शहर के प्राचीन मंदिरों में से एक माता नगरकोट की महारानी श्रीयंत्र पर विराजित है ।यह मंदिर फाजलपुरा में स्थित है। मान्यता है की माता के दर्शन - पूजन से भक्त को सुख -समृद्धि तथा ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है । उज्जैनी के सम्राट राजा विक्रमादित्य ने नगर के परकोटे पर माता की स्थापना की, ताकि दुःख- दरिद्र नगर में प्रवेश नहीं कर सके और प्रजा सुखी,संपन्न तथा खुशहाल रहे ।


गोवर्धन सागर का किनारा

माता के मंदिर के पीछे गोवर्धन सागर स्थित है । सप्त सागरों में से एक इस सागर का विशेष धार्मिक महत्व है। अधिक मास में श्रद्धालु यहाँ पूजा अर्चना के लिए आते है। मंदिर परिसर में एक प्राचीन बावड़ी भी है, जो वर्ष भर भरी रहती है। प्राचीन मंदिर होने से नवरात्री के अलावा अन्य दिनों में भी श्रद्धालु आते है।


Description In English (Nagarkot Ki Rani)

Nagarkot Ki Rani is the guardian deity of the south-west corner of ancient Ujjaiyini. This is a place of some archaeological importance. Many popular tales of Vikramaditya and Bharthihari are associated with this place. The place is associated with the traditions of Natha Cult also.


The tank facing the temple is of Paramar-period. Both the sides of the tank have two small temples. The idol of Kartikeya in one of the temples is assigned to Gupta period. The Temple is situated on the ancient mud Rampart and hence is known as the queen of the city wall i.e. Nagarkot Ki Rani.

page-shadow
Save Time  | Search  |  Ujjain Directory | Ujjain Darshan | and Many More
It will turn you in new world